📍 माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा, आगर मालवा, म.प्र. – 465445 📞 +91 97523 46803  |  ✉️ RupeshPradhansharma@gmail.com

माँ पीताम्बरा की शरण

शत्रु बाधा, कोर्ट केस और विवाह विलंब से मुक्ति का मार्ग

माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा में पंडित रुपेश प्रधान शर्मा जी के मार्गदर्शन में अपने नाम व गोत्र अनुसार शुद्ध वैदिक विधि से हवन पूजा संपन्न करवाएं — अनुभवी पंडितों द्वारा, ऑनलाइन भी उपलब्ध।

14+ प्रकार की हवन पूजा
2011 से सेवारत परंपरा
ऑनलाइन हवन पूजा सुविधा
पंडित रुपेश प्रधान शर्मा - माँ बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा

हमारा परिचय

पंडित रुपेश प्रधान शर्मा

पंडित रुपेश प्रधान शर्मा जी माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा में वेद, मंत्र, तंत्र एवं ज्योतिष शास्त्र में निपुण अनुभवी पंडितों की टीम के साथ श्रद्धालुओं की सेवा में समर्पित हैं। उनके मार्गदर्शन में की गई हवन पूजा शत्रु बाधा निवारण, कोर्ट केस विजय, विवाह में आ रही बाधाओं के समाधान तथा जीवन की समस्त कठिनाइयों के निवारण के लिए विशेष रूप से प्रभावी मानी जाती है।

यहां प्रत्येक पूजा भक्त के नाम और गोत्र के अनुसार, शुद्ध वैदिक विधि-विधान से अनुभवी पंडितों द्वारा संपन्न करवाई जाती है — मंदिर परिसर में उपस्थित होकर अथवा ऑनलाइन माध्यम से।

"श्रद्धा और विधि — यही माँ बगलामुखी की पूजा का सार है।"

हमारी सेवाएं

पूजा के प्रकार

आपकी आवश्यकता अनुसार माँ बगलामुखी की 14 विशेष हवन पूजा सेवाएं — सभी अनुभवी पंडितों द्वारा संपन्न।

🕉️ पूजा का समय

24 घंटे उपलब्ध — किसी भी समय व्हाट्सएप पर संपर्क करें, आपकी सुविधा अनुसार पूजा का समय तय किया जाएगा।

🔥 हवन पूजा

मंदिर परिसर में उपस्थित होकर विधिपूर्वक हवन पूजा संपन्न करवाएं, नाम व गोत्र सहित संकल्प के साथ।

💻 ऑनलाइन हवन पूजा

दूर रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन हवन पूजा की सुविधा — लाइव वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ें।

पवित्र भेंट

हमारी पवित्र भेंट

मंदिर में विधिवत सिद्ध की गई पवित्र सामग्री, श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं समृद्धि हेतु।

माँ बगलामुखी सिद्ध यंत्र

माँ बगलामुखी सिद्ध यंत्र

शत्रु बाधा से रक्षा एवं विजय प्राप्ति हेतु विधिवत सिद्ध किया गया पीतल यंत्र।

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माँ बगलामुखी सिद्ध कवच

माँ बगलामुखी सिद्ध कवच

नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा एवं मानसिक शांति के लिए धारण किया जाने वाला सिद्ध कवच।

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माँ बगलामुखी सिद्ध तावीज

माँ बगलामुखी सिद्ध तावीज

नाम व गोत्र अनुसार विधिवत सिद्ध किया गया तावीज, विजय व सुरक्षा हेतु।

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मंदिर का इतिहास

माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा से जुड़ी सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार इसकी स्थापना द्वापर युग में महाभारत काल में हुई थी। कथा के अनुसार, जब पांडव अपने अज्ञातवास एवं युद्ध की तैयारियों के दौरान कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन में महाराज युधिष्ठिर ने इसी स्थान पर माँ बगलामुखी की गहन आराधना की थी। मान्यता है कि माँ की कृपा से ही पांडवों को शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति और मार्ग मिला। यह एक सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा है, जिसे श्रद्धालु आज भी उतनी ही आस्था से मानते हैं — यद्यपि यह आधुनिक इतिहास के प्रमाणित दस्तावेज़ी तथ्य के रूप में दर्ज नहीं है, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही लोक-मान्यता और श्रद्धा का विषय है।

यहां विराजमान माँ बगलामुखी की प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता है — अर्थात् यह प्रतिमा किसी मूर्तिकार द्वारा गढ़ी नहीं गई, बल्कि धार्मिक मान्यता के अनुसार स्वयं धरती से प्रकट हुई थी। यही कारण है कि नलखेड़ा के इस मंदिर को साधारण मंदिर न मानकर एक जागृत सिद्धपीठ के रूप में पूजा जाता है, जहां की गई प्रार्थनाएं शीघ्र फलदायी मानी जाती हैं। मंदिर लखुंदर नदी के पावन तट पर, नलखेड़ा कस्बे (जिला आगर मालवा, मध्य प्रदेश) में स्थित है — यह स्थान वर्षों से साधु-संतों, तांत्रिकों और सामान्य श्रद्धालुओं, सभी के लिए समान रूप से आस्था का केंद्र रहा है।

मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता यहां की त्रिशक्ति स्वरूप प्रतिमा है — एक ही गर्भगृह में मध्य में माँ बगलामुखी, तथा उनके साथ माँ लक्ष्मी एवं माँ सरस्वती का संयुक्त स्वरूप विराजमान है, जो शक्ति, समृद्धि और ज्ञान — तीनों का एक साथ आशीर्वाद माने जाते हैं। मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण, हनुमान जी एवं भैरव जी की भी पूजा होती है, जिससे यह स्थान एक संपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र का रूप ले लेता है।

माँ बगलामुखी को हिन्दू तंत्र परंपरा की दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माना गया है, जो विशेष रूप से शत्रु-बाधा नाश, वाक्-सिद्धि, न्यायिक विजय एवं नकारात्मक शक्तियों के शमन के लिए पूजी जाती हैं। इसी कारण नलखेड़ा यह स्थान सदियों से हवन, साधना एवं वैदिक-तांत्रिक अनुष्ठान परंपराओं का एक प्रमुख केंद्र रहा है, जहां देश के कोने-कोने से साधक व श्रद्धालु विशेष पूजा-अनुष्ठान करवाने आते हैं।

मंदिर के वर्तमान भौतिक स्वरूप का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक चरण सन् 1815 के आसपास हुए जीर्णोद्धार से जुड़ा है, जब यहां सभामंडप का निर्माण करवाया गया था — उपलब्ध ऐतिहासिक उल्लेखों में इसका संकेत विक्रम संवत 1816 के आसपास मिलता है। इसका अर्थ है कि आज दिखने वाला मंदिर-परिसर पूर्णतः वही प्राचीन संरचना नहीं है जो द्वापर युग में रही होगी, बल्कि यह समय-समय पर हुए जीर्णोद्धार व पुनर्निर्माण का परिणाम है — फिर भी मूल स्थान की पवित्रता और सिद्धपीठ के रूप में मान्यता सदियों से अक्षुण्ण बनी हुई है।

माँ का पीले रंग से एक विशेष एवं गहरा संबंध माना जाता है, जिस कारण उन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है। इसीलिए यहां की पूजा-विधि में पीले वस्त्र धारण करना, पीले फूल अर्पित करना एवं पीली हवन सामग्री का प्रयोग करना विशेष महत्व रखता है — यह परंपरा आज भी मंदिर की प्रत्येक पूजा में विधिवत रूप से निभाई जाती है।

माँ बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा - रात्रि दृश्य

श्रद्धालुओं के अनुभव

ग्राहक प्रशंसापत्र

"पंडित जी के मार्गदर्शन में माँ बगलामुखी की पूजा करवाने के बाद मेरी परेशानियां दूर हुईं और मुझे नई सफलता मिली।"

दीपक पंचालरतलाम

"पंडित रुपेश जी से मिलने के बाद माँ बगलामुखी की कृपा से मेरी कई समस्याएं सुलझ गईं।"

कालू सिंह जीउन्हेल नागेश्वर

"पंडित जी की पूजा-विधि से माँ बगलामुखी की कृपा प्राप्त हुई और मुझे जीवन में नई उपलब्धि हासिल करने में मदद मिली।"

सम्राट राठौरग्राम माधोपुर, जिला रतलाम

"पंडित रुपेश जी से मिलकर मेरी बहुत सी समस्याओं का समाधान हुआ, माँ बगलामुखी की कृपा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।"

तूफान सिंह गुर्जरग्राम माधोपुर, जिला रतलाम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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